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MGKVP के 48वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उपाधियों की घोषणा



 28/Jul/26

 स्वर्ण पदक विजेताओं और उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान

वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP), वाराणसी का 48वां दीक्षांत समारोह सोमवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में गरिमामय एवं भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कैप्टन बी.के. त्यागी, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, राज्य मंत्री रजनी तिवारी, कुलपति, कुलसचिव, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं कुलगीत के साथ हुआ। इसके उपरांत कुलपति ने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, शोध, नवाचार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति तथा विभिन्न शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के माध्यम से नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।

अपने संबोधन में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने एवं निभाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के उत्थान, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

राज्यपाल ने कहा कि आज का युवा भारत के भविष्य का निर्माता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान रूप से आवश्यक बताया।

मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, नवाचार और सकारात्मक सोच ही सफलता की वास्तविक कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, चुनौतियों को अवसर में बदलने तथा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सुधार, अनुसंधान, डिजिटल संसाधनों के विस्तार तथा रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ज्ञान, शोध और नवाचार के ऐसे केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दें।

समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपाधियों की घोषणा की गई। विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय में शिक्षण, शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को भी विशेष सम्मान से नवाजा गया। पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों ने शैक्षणिक मर्यादा के अनुरूप पारंपरिक दीक्षांत परिधान धारण कर सहभागिता की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर उत्सवमय वातावरण में दिखाई दिया। समारोह में विभिन्न विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में कुलसचिव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ 48वें दीक्षांत समारोह का औपचारिक समापन हुआ। समारोह ने विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए उन्हें समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।


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