वाराणसी। रोहनिया स्थित डैलिम्स सनबीम स्कूल एंड हॉस्टल में आयोजित त्रिदिवसीय एएफएसओ भारतीय क्षेत्रीय सम्मेलन 'नॉर्थ ज़ोन मेंबर स्कूल्स-2026' का रविवार को भव्य समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों, समन्वयकों और विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक नागरिकता जैसे विषयों पर विचार साझा किए।
समापन दिवस की शुरुआत प्रतिभागियों के लिए प्रातःकाल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन से हुई। इसके साथ ही उन्हें वाराणसी के प्रमुख घाटों, मंदिरों, बनारसी हस्तशिल्प, आर्ट एंड क्राफ्ट, मूर्तिकला, बनारसी साड़ियों और काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया गया, जिससे देशभर से आए प्रतिनिधियों को काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को निकट से जानने का अवसर मिला।
इसके बाद विद्यालय के सभागार में आयोजित समापन समारोह में डीन ऑफ एकेडमिक्स श्री सुभोदीप डे ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि एएफएसओ क्षेत्रीय सम्मेलन की मेजबानी डैलिम्स सनबीम परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है तथा काशी की धरती पर आयोजित यह सम्मेलन शिक्षा और संस्कृति के वैश्विक संवाद को नई दिशा देने वाला रहा।
समारोह में विद्यालय के विद्यार्थियों ने 'यूफोनी बैंड' की शानदार ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को एएफएसओ के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप 'बाबा' मधोक ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सम्मेलन केवल विभिन्न राज्यों के लोगों का मिलन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, समर्पण, भाईचारा और सांस्कृतिक मूल्यों को विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को वैश्विक दृष्टिकोण के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आज की शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस अवसर पर डॉ. प्रदीप 'बाबा' मधोक, निदेशिका श्रीमती पूजा मधोक तथा एडिशनल डायरेक्टर श्री माहिर मधोक ने विशिष्ट अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
निदेशिका श्रीमती पूजा मधोक ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि नई संस्कृतियों को समझना, नए विचारों को स्वीकार करना और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन, गंगा आरती, काशी भ्रमण और सम्मेलन के दौरान प्राप्त अनुभव प्रतिभागियों के जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियाँ बनेंगे।
समारोह के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती गुरमीत कौर ने सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी की सक्रिय सहभागिता और सहयोग से यह सम्मेलन सफल, प्रेरणादायी और यादगार बन सका।
तीन दिवसीय सम्मेलन के सफल समापन के साथ ही प्रतिभागियों ने शिक्षा, संस्कृति और वैश्विक सहयोग के नए अनुभवों के साथ काशी से विदाई ली।